Follow Us:

RDG बंद होने पर सरकार कोर्ट जाएगी, विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा

➤ RDG समाप्त होने से राज्य बजट पर 15–20% बोझ, वित्तीय संतुलन बिगड़ने की आशंका
➤ DA, एरियर भुगतान और नई भर्तियों पर पड़ सकता है सीधा असर
➤ संसाधनों से 50% रॉयल्टी की मांग, सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की गैरहाजिरी पर नाराजगी



शिमला में हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने के फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस निर्णय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि RDG समाप्त होने से हिमाचल के कुल बजट पर 15 से 20 प्रतिशत तक का सीधा असर पड़ेगा, जिससे वित्तीय व्यवस्था गंभीर संकट में आ सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो परियोजनाएं अब ऋण मुक्त हो चुकी हैं, उनमें हिमाचल को 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए। उन्होंने दोटूक कहा कि यदि RDG बंद होती है, तो संसाधनों से होने वाली आय में राज्य का उचित हिस्सा सुनिश्चित किया जाए। इस मुद्दे पर वित्त मंत्री से चर्चा के बाद अब अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री स्तर पर होने की बात कही गई है।

वित्त विभाग की कैबिनेट में दी गई प्रस्तुति में भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित किया गया। विभाग ने चेताया कि RDG बंद होने की स्थिति में कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और एरियर का भुगतान करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में लगभग 8500 करोड़ रुपये एरियर और 5000 करोड़ रुपये DA/DR लंबित है, जो संकट में फंस सकता है।

आर्थिक तंगी के कारण सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। इसमें नई भर्तियों पर रोक, दो साल से खाली पदों को समाप्त करना, और ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर विचार शामिल है। कई सरकारी संस्थानों को बंद करने और घाटे में चल रहे बोर्ड/प्रोजेक्ट्स को निजी हाथों में सौंपने की संभावना भी जताई गई है।

इस विषय पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के शामिल न होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और इसे पूरे प्रदेश के हित का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी दल का नहीं बल्कि हिमाचल के अस्तित्व का प्रश्न है।

वित्त विभाग ने बताया कि GST लागू होने के बाद राजस्व बढ़ाने की सीमाएं कम हुई हैं। इसके बावजूद उपकर लगाकर लगभग 300 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली की गई है। गैर-कृषि भूमि पर नया राजस्व लागू किया गया है और राज्य संपत्तियों के मौद्रिकरण पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही PPP मॉडल, राजस्व चोरी पर सख्ती, DISCOMs के निजीकरण और PSUs के विलय/निजीकरण जैसे विकल्पों पर विचार चल रहा है।

राज्य सरकार इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाना चाहती थी, लेकिन राज्यपाल ने बजट सत्र निकट होने का हवाला देते हुए प्रस्ताव वापस भेज दिया। अब विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा।